#Blog #दिन विशेष #बिलासपुर

होली: रंगों में घुला अपनापन और सद्भाव

Spread the love

फाल्गुन की हवा में हल्की-सी मिठास घुलती है, सरसों के खेत पीले रंग से मुस्कुराते हैं और गलियों में ढोलक की थाप सुनाई देती है, तब समझ लीजिए कि होली आ गई है। होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, यह दिलों को रंगने का पर्व है—रिश्तों को नया अर्थ देने का, मन के कोनों में जमी धूल को प्रेम से साफ करने का।होली हमें याद दिलाती है कि जीवन का असली रंग बाहरी नहीं, भीतर का होता है। जब हम एक-दूसरे के चेहरे पर गुलाल लगाते हैं, तो दरअसल हम अहंकार को उतारकर अपनापन ओढ़ लेते हैं। यह त्योहार हमें सिखाता है कि मन की दूरियाँ रंगों की एक मुट्ठी से भी मिटाई जा सकती हैं।होली की पौराणिक कथा होलिका दहन हमें बताती है कि सत्य और भक्ति की जीत निश्चित है। प्रहलाद की अटूट श्रद्धा और होलिका के अहंकार की कहानी हमें यह विश्वास देती है कि अंततः प्रेम, विश्वास और सद्भाव ही विजयी होते हैं। यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जब समाज को आपसी समझ और सौहार्द की सबसे अधिक आवश्यकता है।

होली की सबसे सुंदर बात यह है कि यह हर वर्ग, हर उम्र, हर समुदाय के लोगों को एक साथ लाती है। बच्चे हँसी में डूबे रहते हैं, बुजुर्ग आशीर्वाद के रंग बिखेरते हैं, और युवा दोस्ती की नई इबारत लिखते हैं। इस दिन कोई बड़ा-छोटा नहीं होता, सबके चेहरे एक-से रंगों से सजे होते हैं—जैसे प्रकृति कह रही हो कि हम सब एक हैं।लेकिन होली का असली अर्थ सिर्फ रंग खेलना नहीं, बल्कि मन के भीतर की कड़वाहट को धो देना है। अगर किसी से मनमुटाव हो, तो यही सही समय है एक कदम आगे बढ़कर कहने का—“भूल जाइए, गले मिलिए।” क्योंकि रिश्ते तब ही सच्चे होते हैं जब उनमें क्षमा और समझ का रंग घुला हो।आज के समय में, जब जीवन की भागदौड़ हमें अपनों से दूर कर देती है, होली एक ठहराव का निमंत्रण है। यह कहती है—कुछ पल निकालिए, अपनों के साथ बैठिए, हँसिए, गाइए, और उन यादों को संजोइए जो जीवन भर साथ रहेंगी।आइए, इस होली पर हम केवल चेहरों को नहीं, दिलों को रंगें। ऐसा रंग चुनें जो कभी फीका न पड़े—विश्वास का, प्रेम का, और सद्भाव का।क्योंकि जब दिल रंग जाते हैं, तभी होली सच में सफल होती है।आप सभी को प्रेम, शांति और सद्भाव से भरी होली की हार्दिक शुभकामनाएँ। 🌸

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *